Jai Gurudev! Divine Soul!

आपको, आपके परिवार एवं मित्रों को दिव्य प्रज्ञा परम सिद्ध श्री श्री महावतार बाबाजी पराशक्ति चिकित्सा और आशीर्वाद प्रदान करतें हैं!

दूसरों के दूख से दूखी, और दूसरों के सुख से जो खुश हो वो *संत है*।।

सुख और दुख में जो तटस्थ है वो *योगी है*।।

दूसरों के दूख से खुश, और दूसरों के सुख से जो नाखुश हो वो *मनोरोगी है*।।

राग, द्वेष, और लोभ सबको मनोरोगी बना रहा है। आज के मतलबी और स्पर्धात्मक विश्व में हर कोई एक-दूसरे से आगे निकलना चाहता है, और उसके लिए कोई भी किमत चुकाने को तैयार है।। कैसी विडंबना है, कि अघटित किमत चूकाने से पायी गयी चीज का मूल्य स्वयं समाप्त हो जाता है।। फिर भी लोग दौड़े जा रहे है! ईश्वर ही सबको सद्बुद्धि दे!

आओ हम इश्वर से प्रार्थना करें की हमे संत सा कोमल ह्रदय दें जो हर किसीके लिए धड़कता हो!

तथास्तु! स्वस्ति सिद्धं! आमीन! सो बी इट!

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