Jai Gurudev! Divine Soul!

*लोगो का मुंह बंध करने के लिए अपना मुंह बंध रखे!*

हिन्दी में एक कहावत है, “जितने मुंह उतनी बातें”।।

इसका अर्थ है, कोई भी घटना को हर कोई अपनी नज़र से देखता है, और अपनी (बिन मांगी) राय देते है।। इतना ही नही लोग दूसरो की निजी जीवन में भी दखल देते हुए अपनी राय प्रकट करते है।।

हम किस किस का मुंह बंध करेंगे? इससे अच्छा है कि हम हमारा ही मुंह बंध रखे।। कोई हमें कितना भी उकसाने प्रयत्न करें, हमें संयम बनाए रखना है।। अगर हम कोई प्रतिक्रिया न दे, तो सामने वाला हतोत्साह हो जाता है।। 

जब तक हमारा अंतःकरण शुद्ध है, हमे दुनिया की परवाह नही करनी चाहिए ।। हम हमारे कर्तव्य को निष्ठापूर्वक निभाए उतना ही काफी है।। हमारी राह और चाह अगर सही होगी तो आज नही तो कल लोग हमसे जुड़ेंगे ।।

आओ हम इश्वर से प्रार्थना करें की हमें हमारी मस्ती में मस्त रखे और लोगो की आलोचना से प्रतिरक्षित रखे!

तथास्तु! स्वस्ति सिद्धं! आमीन! सो बी इट!

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