Jai Gurudev! Divine Soul!

You and your family and friends are blessed and healed by Divya Pragya Param Siddha Shri Shri Maha Avatar Babaji!

Whatever we give, we should give as an instrument of God.

देनेवाला ऊपरवाला है और लेनेवाला उसका आश्रित है! हम तो केवल एक माध्यम है, उसके अतिरिक्त कुछ नहीं, तो फिर किस बात का गर्व और घमंड?

तीन प्रकार की योनियां है – देव, प्राणी और मनुष्य।।

देवो का प्रमुख स्वभाव है देना।। प्राणियों का प्रमुख स्वभाव है लेना और मनुष्य का प्रमुख स्वभाव है लेना और देना।।

अगर हम लेने की जगह देना सीख जाए तो हम मनुष्य योनि से उठकर देव योनि में जा सकते हैं और अगर हम देने से ज्यादा लेने लगे तो हम प्राणी की योनि में जा हैं.

लोग देने से डरते हैं की कहीं मेरे पास जो है वह समाप्त न हो जाए, या तो कुछ न होने से देने में संकोच करते हैं. लेकिन बाबाजी कहते हैं कि अगर हम देना सीख जाए तो देने के लिए भी ऊपर वाला देता है और छप्पर फाड़ के देता है.

ईश्वर से प्रार्थना करते हैं यह हमें ज्यादा से ज्यादा देने की प्रेरणा करें और देव योनि में स्थान दें! 

तथास्तु! स्वस्ति सिद्धम! आमीन! सो बी इट!

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