Jai Gurudev! Divine Soul!

आपको, आपके परिवार एवं मित्रों को दिव्य प्रज्ञा परम सिद्ध श्री श्री महावतार बाबाजी पराशक्ति चिकित्सा और आशीर्वाद प्रदान करतें हैं!

*मुण्डे  मुण्डे  मतिर्भिन्ना  कुंडे  कुंडे नवं पयः |*

*जातौ जातौ  नवाचाराः नवा वाणी मुखे मुखे  ||*

उपरोक्त सुभाषित वायु पुराण से लिया गया है।।

इसका अर्थ यह है की प्रत्येक व्यक्ति का मानसिक स्तर और विचार अलग अलग होते है।। विभिन्न कुंडमें पानी की गुणवत्ता भी अलग होती है।। विविध जातियों और 

समुदायों आचार-विचार और व्यवहार में भी अंतर होता है।। विभिन्न देशो और लोगो को भाषाओ में भी अंतर होता है।।

समुचित विश्व में काफी सारी विविधता है, ऐसे में विविधता में एकता भारत की शान है।।

आओ हम इश्वर से प्रार्थना करें की हमें अलग अलग विचारधाराओं को स्वीकार करने की बुद्धि दें!

तथास्तु! स्वस्ति सिद्धं! आमीन! सो बी इट!

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